Tuesday, October 13, 2009

सिंगापुर में जुटाई गई राशि पर कानूनी फंदा

अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) पर विदेश में बनाई गई अपनी उपकंपनियों के जरिए भी अरबों रुपए की पूँजी जुटाकर उसके माध्यम से भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित करने और वित्तीय नियमों व प्रावधानों के उल्लंघन की शिकायतें भारतीय रिजर्व बैंक और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पास भेजी गई हैं। लेकिन सरकारी तंत्र की कछुआ चाल कोई नतीजा नहीं निकाल पा रही है।

इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को पत्र लिख चुके वरिष्ठ माकपा सांसद वासुदेव आचार्य जल्दी ही प्रधानमंत्री से मिलकर यह मामला उठाने वाले हैं। आचार्य ने बताया- मैंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय माँगा है। चुनावी व्यस्तता खत्म होते ही उनसे मेरी मुलाकात होगी। अपनी खोजबीन में नईदुनिया को एडीएजी के कुछ और दिलचस्प मामले मिले। ऐसा एक मामला सिंगापुर की अपनी कंपनी के जरिए विदेशी पूँजी जुटाकर फिर उसे अपनी ही दूसरी कंपनियों में लगाकर उनके प्रिफेरेंशियल शेयरों में निवेश करके मुनाफा कमाने का है।एडीएजी के प्रवक्ता से जब इन आरोपों और शिकायतों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- किसी भी परियोजना के लिए जुटाई गई पूँजी का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है। जहाँ तक शिकायतों की बात है तो किसी भी शिकायत पर जब जरूरी हुआ तो संबद्ध कंपनी ने सरकार और संबंधित संस्थाओं को अपना स्पष्टीकरण दे दिया है। नईदुनिया को मिले दस्तावेजों के मुताबिक सिंगापुर की एक अनलिमिटेड कंपनी "इमर्जिंग मार्केट्स एंड इन्वेस्टमेंट पीटीई, सिंगापुर" (इमिट्स) का स्वामित्व "रिलायंस इनोवेंचर्स प्रा. लि."(आरआईपीएल), जिसे अनिल अंबानी की पर्सनल इन्वेस्टमेंट कंपनी माना जाता है, के पास है। इमिट्स का पुराना नाम रिलायंस प्रोजेक्ट्स पीटीई है।

इमिट्स ने 2007 में "नेक्सजेन कैपिटल लि. आयरलैंड" से 750 मिलियन डॉलर 2010 में मेच्योर होने वाले सिक्योर्ड फ्लोटिंग रेट बॉन्ड्स जारी करके जुटाए। इमिट्स ने यह पूँजी एफडीआई के रूप में एएए एंड संस इंटरप्राइजेज प्रालि में लगा दी। यह भी अनिल अंबानी की निजी निवेश कंपनी है। इसके बाद एएए एंड संस इंटरप्राइजेज प्रा.लि. ने यह रकम एएए फैसलिटीज सोल्युशंस के प्रिफेरेंशियल शेयरों में लगा दी। इस कंपनी ने इस पूँजी को एएए पॉवर सिस्टम ग्लोबल प्रालि, एएए इंटरप्राइजेज प्रालि, एएए कम्युनिकेशंस प्रालि और एएए प्रोजेक्ट वेंचर्स प्रालि के प्रिफेरेंशियल शेयरों में लगा दिया।

ये चारों कंपनियाँ रिलायंस इनोवेंचर्स प्रालि की उप कंपनियाँ हैं। इन तमाम कंपनियों के जो दस्तावेज नईदुनिया के पास हैं, उनसे इसकी पुष्टि होती है। इस विदेशी निवेश को पूरी तरह विदेशी मुद्रा विनिमय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए इस मामले की शिकायत भी कुछ सांसदों ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक से की है। इसमें कहा गया है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लेने के लिए अनिल अंबानी की निजी निवेश कंपनियों ने एफआईपीबी से मंजूरी नहीं ली, क्योंकि जिस उप कंपनी ने यह कर्ज लिया वह अनलिमिटेड लाइबेलिटी कंपनी है और रिलायंस इनोवेंचर्स प्रालि ने उप कंपनियों के कर्ज की गारंटी ली। लेकिन इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक से कोई अनुमति नहीं ली गई, क्योंकि यह विदेशी उपकंपनियों की भारत में कोई स्वीकृत (बोनाफाइड) व्यावसायिक गतिविधि नहीं हैं।

रिलायंस इनोवेंचर्स प्रालि की उपकंपनी इमिट्स (इमर्जिंग मार्केट्स) रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना पैसा लेने और उसका निवेश करने की वित्तीय गतिविधियों में संलग्न है। अनिल अंबानी की इन निजी निवेश कंपनियों ने अपनी पूँजी का इस्तेमाल घोषित उद्देश्यों के लिए न करके अपनी भारतीय कंपनियों के शेयर खरीदने में किया। शिकायत में कहा गया है कि यह फेमा का उल्लंघन है।नईदुनिया की पड़ताल में ऐसा ही एक दूसरा मामला जर्सी आईलैंड की बैटिस्टे कंपनी के जरिए 500 मिलियन डॉलर की विदेशी पूँजी को शेयर बाजार में लगाने का सामने आया। मिली जानकारी के मुताबिक बैटिस्टे कंपनी भी एडीएजी समूह की रिलायंस इनोवेंचर्स प्रालि की शत-प्रतिशत उपकंपनी है। बैटिस्टे ने आईसीआईसीआई बैंक की हांगकांग शाखा से 500 मिलियन डॉलर की पूँजी उठाई। बैटिस्टे ने यह पूँजी एएए कार्पोरेशन प्रालि (अनिल अंबानी की निजी निवेश कंपनी) में लगा दी। वहाँ से यह पूँजी एएए प्रोजेक्ट्स वेंचर्स प्रालि, एएए कम्युनिकेशंस प्रालि, एएए पावर सिस्टम्स ग्लोबल प्रालि और एएए इंटरप्राइजेज प्रालि में लगाई गई। ये चारों कंपनियाँ एडीएजी की चार लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदार हैं। नईदुनिया के पास इसके दस्तावेज हैं। इन कंपनियों ने यह पूँजी शेयर बाजार में लगा दी। यह निवेश भी इन उपकंपनियों ने बिना भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के किया और इस मामले की शिकायतें भी कुछ सांसदों ने रिजर्व बैंक और प्रवर्तन निदेशालय से करते हुए एडीएजी पर वित्तीय कानूनों और फेमा के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

No comments:

Post a Comment